*दिल को झकझोड देने वाली घटना*
*आँसुओं के समंदर को थाम कर किस प्रकार माता पिता ने अपने जिगर के टुकड़े के नेत्रदान कराए*
*उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार 11 साल के मासूम के आकस्मिक निधन उपरांत नेत्रदान किए गये*
*किस प्रकार 11 साल का शिवांश ढींगरा समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया*
मां-बाप के लिए उसके दिल के टुकड़े इकलौते पुत्र का अचानक चले जाना इस संसार का सबसे बड़ा दुख होता है और इस दुख की घड़ी में मां-बाप के द्वारा अपने जिगर के टुकड़े पुत्र के नेत्रदान करना बहुत ही मार्मिक घटना है इससे बड़ा परोपकार कोई हो नहीं सकता ।
उत्तराखंड के गदरपुर क्षेत्र के ग्राम गोपाल नगर की बहुत ही गरीब परिवार के गुलशन ढींगरा के इकलौते पुत्र शीवांश ढींगरा उम्र 11 साल का अचानक हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया दुख की इस घड़ी में अपने आप को संभालते हुए परिवार ने साहस का परिचय देते हुए समाज कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए अपने पुत्र के नेत्रदान की इच्छा जाहिर की ताकि किन्हीं दो बच्चों के जीवन में रोशनी आ सके जिसके नेत्रों से किन्हीं दो बच्चों के जीवन में रोशनी आएगी उत्तराखंड के इतिहास में इस प्रकार नेत्रदान की दूसरी घटना है जिसमें 11 साल के मौसम बच्चे के निधन उपरांत नेत्रदान किए गए एक माता-पिता के लिए उनके इकलौते पुत्र थे दिवंगत शिवांश ढींगरा के लिए अनेको सामाजिक संगठनों प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल,सोचो डिफ्रेंट,पंजाबी सभा,जय भवानी जागरण मंडल,सनातन धर्म मंदिर समिति,श्री गुरु रामदास संस्था,श्री श्याम मंडल,जियो जिंदगी,गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा,नगर पालिका परिषद,श्री राम लीला कमेटी,श्री शिव मंदिर राम लीला कमेटी,शिव पार्वती रामलीला कमेटी आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की










