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माता कैलाश देवी के सानिध्य में निकली यात्रा बनी मां-बेटे के प्रेम की मिसाल, मिलन का पल देख हर आंख हुई नम

माता कैलाश देवी के सानिध्य में निकली यात्रा बनी मां-बेटे के प्रेम की मिसाल, मिलन का पल देख हर आंख हुई नम
गदरपुर
गदरपुर के सुख शांति नगर स्थित श्री दुर्गा ज्योति मंदिर से माता कैलाश देवी के पावन सानिध्य में विगत 57 वर्षों से निरंतर निकल रही 10 दिवसीय तीर्थ यात्रा इस वर्ष भी श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ संपन्न हुई। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं रही, बल्कि इस बार मां-बेटे के अटूट प्रेम की ऐसी मिसाल बन गई, जिसने हर किसी के दिल को छू लिया।
मां वैष्णो देवी सहित देश के कई प्रमुख शक्तिपीठों के दर्शन कर लौटे श्रद्धालुओं में शिव मंदिर निवासी श्रीमती संज्ञा तिवारी भी शामिल थीं, जिन्हें उनके बेटे शिवा तिवारी ने पूरे श्रद्धा भाव से इस पावन यात्रा पर भेजा था। माता कैलाश देवी के आशीर्वाद से संपन्न इस यात्रा ने जहां आत्मिक शांति दी, वहीं घर वापसी पर एक ऐसा भावुक क्षण सामने आया, जिसे देख हर आंख नम हो गई।
जैसे ही 10 दिनों बाद संज्ञा तिवारी अपने घर पहुंचीं और उनकी नजर अपने बेटे पर पड़ी, उनकी आंखें खुशी और भावुकता से छलक उठीं। बेटे शिवा ने तुरंत आगे बढ़कर मां को थाम लिया। यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, बल्कि वर्षों के स्नेह, सम्मान और अपनत्व का जीवंत रूप था।
वहां मौजूद लोगों ने बताया कि मां के चेहरे पर संतोष और गर्व साफ झलक रहा था, मानो वह कह रही हों कि उनका बेटा उनके लिए हर खुशी समर्पित करने को तैयार है। वहीं शिवा तिवारी की आंखों में यह संतोष था कि उन्होंने अपनी मां की एक बड़ी इच्छा पूरी कर दी।
शिवा ने भावुक होकर कहा कि यह सब माता कैलाश देवी की कृपा है, जिनके आशीर्वाद से उनकी मां ने सकुशल यात्रा पूर्ण की। उन्होंने कहा कि मां की सेवा ही उनके जीवन का सबसे बड़ा धर्म है और वह आगे भी उन्हें ऐसे ही पावन तीर्थों के दर्शन कराते रहेंगे।
इस भावुक मिलन को जिसने भी देखा, वह खुद को भावनाओं से रोक नहीं सका। हर किसी ने बेटे को आशीर्वाद दिया और इस रिश्ते की सराहना की। यह दृश्य सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया—कि भागदौड़ भरी जिंदगी में भी अगर सच्चे मन से रिश्तों को निभाया जाए, तो वही रिश्ते सबसे बड़ी पूंजी बन जाते हैं।

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